क्या गन्नौर मार्केट कमेटी के सचिव दीपक सिहाग दोषी हैं..
भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के चलते निलंबन, मुख्यालय छोड़ने पर रोक…
हरियाणा : के गन्नौर में मार्केट कमेटी के सचिव दीपक सिहाग को भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते निलंबित कर दिया गया है। सरकार ने यह सख्त कदम विभिन्न शिकायतों और अनियमितताओं की जांच के बाद उठाया है। सिहाग पर वित्तीय गड़बड़ियों और पद के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं, जिसके बाद उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। निलंबन के बाद उन पर मुख्यालय से बाहर जाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है, जिससे वे जांच में हस्तक्षेप न कर सकें।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सिहाग के खिलाफ कई व्यापारियों और किसान संगठनों ने शिकायतें दर्ज कराई थीं। इन शिकायतों में मुख्य रूप से मंडी शुल्क में अनियमितता, अवैध वसूली और मार्केट कमेटी के धन के दुरुपयोग के आरोप शामिल हैं। सरकार ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए थे, और प्राथमिक जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद सिहाग को निलंबित कर दिया गया।
गन्नौर कृषि उपज मंडी हरियाणा की प्रमुख मंडियों में से एक है, जहां बड़ी मात्रा में अनाज, सब्जियां और अन्य फसलें खरीदी और बेची जाती हैं। किसानों के अनुसार, यहां भ्रष्टाचार लंबे समय से जारी था और वे लगातार इसकी शिकायत कर रहे थे। सरकार की इस कार्रवाई से किसानों और व्यापारियों में संतोष देखा जा रहा है। उनका मानना है कि इससे मंडी में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।
इस मामले पर मार्केट कमेटी के अन्य अधिकारियों से भी पूछताछ की जा रही है। प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या यह भ्रष्टाचार केवल एक व्यक्ति तक सीमित था या इसमें अन्य लोग भी शामिल थे। अगर जांच में अन्य अधिकारियों की संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
इस निलंबन के बाद हरियाणा सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सरकार प्रदेश में स्वच्छ प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठा रही है। इससे पहले भी राज्य में कई अधिकारियों को भ्रष्टाचार के आरोपों में निलंबित किया जा चुका है।
हालांकि, दीपक सिहाग ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा है कि उन्हें राजनीति के तहत फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह पूरी जांच में सहयोग करेंगे और सच जल्द ही सामने आ जाएगा। वहीं, प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने तक सिहाग को किसी भी आधिकारिक कार्य में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सरकार द्वारा गठित विशेष जांच टीम (SIT) इस मामले की गहन जांच कर रही है और जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। यदि जांच में सिहाग दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। इस पूरे घटनाक्रम पर व्यापारियों, किसानों और विपक्षी दलों की नजर बनी हुई है।
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