अप्रैल 2025 में कब है राम नवमी व्रत?
अप्रैल में प्रमुख व्रत-त्योहारों की तिथियां और महत्व…..
नई दिल्ली : अप्रैल का महीना धार्मिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इस महीने में कई प्रमुख व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं। खासकर हिन्दू धर्म में यह समय देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना, उपवासी व्रत और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए महत्वपूर्ण है। इस महीने की शुरुआत से लेकर अंत तक कई विशेष अवसर आते हैं, जो भक्तों के लिए आध्यात्मिक उन्नति और आशीर्वाद प्राप्त करने का मौका होते हैं। अप्रैल 2025 में भी कुछ प्रमुख धार्मिक पर्व हैं जिनका विशेष महत्व है।
चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri 2025) इस महीने का पहला महत्वपूर्ण व्रत है, जो विशेष रूप से देवी दुर्गा की पूजा-अर्चना से संबंधित होता है। यह व्रत नौ दिनों तक चलता है, और इस दौरान देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। 2025 में यह 2 अप्रैल से शुरू होगा और 10 अप्रैल तक चलेगा। इस दौरान भक्तों द्वारा उपवासी रहकर, देवी की उपासना की जाती है, और विशेष रूप से नौ दिनों तक नवरात्रि व्रत रखा जाता है।
राम नवमी (Ram Navami 2025) भी इस महीने का एक प्रमुख पर्व है, जो 9 अप्रैल को मनाया जाएगा। यह पर्व भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और खासकर राम भक्तों के लिए एक खास दिन होता है। इस दिन भक्त श्रीराम के चरित्रों का बखान करते हैं, पूजा अर्चना करते हैं और रामायण का पाठ भी करते हैं।
इसके अलावा, कामदा एकादशी (Kamada Ekadashi 2025) 5 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और भक्तों द्वारा उपवासी रहकर व्रत किया जाता है। इस दिन का महत्व इस बात से जुड़ा हुआ है कि यह दिन भगवान विष्णु के प्रति श्रद्धा और भक्ति बढ़ाने के लिए विशेष रूप से माना जाता है।
हनुमान जयंती (Hanuman Jayanti 2025) 14 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान हनुमान की पूजा की जाती है और विशेष रूप से उनके भक्त अपने जीवन में हनुमान जी के आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए व्रत रखते हैं। हनुमान जयंती का पर्व खासकर देश के विभिन्न हिस्सों में धूमधाम से मनाया जाता है।
इसके साथ ही, चैत्र पूर्णिमा (Chaitra Purnima 2025) 24 अप्रैल को मनाई जाएगी। यह दिन विशेष रूप से जप, तप और धार्मिक अनुष्ठान के लिए होता है। इस दिन को खासकर सत्यनारायण की पूजा के लिए उपयुक्त माना जाता है।
अप्रैल के महीने में इन पर्वों और व्रतों का महत्व इसलिए है क्योंकि यह समय आध्यात्मिक उन्नति और शुद्धिकरण का होता है। भक्त इस दौरान देवी-देवताओं की पूजा अर्चना करते हुए अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इन व्रतों के दौरान लोग अपने जीवन में शांति, सुख और समृद्धि की कामना करते हैं और धार्मिक कार्यों के माध्यम से आत्मिक उन्नति प्राप्त करते हैं।
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